Sunday, March 16, 2014

राजा पॉकेट बुक-रहस्यमयी झील


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राजा पॉकेट बुक-रहस्यमयी झील
 बाल पॉकेट बुक में एस.सी. बेदी का नाम ही बाल पॉकेट के बिकने की गारंटी हुवा करती थी उनके राजन-इक़बाल सीरीज़ की जितनी नक़ल हुवी है उससे ज्यादा तो किसी और चरित्र नक़ल नहीं हुयी होगी। पर उन्होंने कुछ रोमांचक कथा सीरीज़ में बाल उपन्यास लिखी है पर राजन-इक़बाल सीरीज़ के आगे इनको ज्यादा तवाज़ो नहीं मिली थी कारण सीधा सा था कि हर प्रकाशक सिर्फ राजन-इक़बाल सीरीज़ ही लिखवाना चाहता था क्योंकि वो बहुत बिकता था अगर मै अपनी बात करूँ तो मैंने भी राजन-इक़बाल सीरीज़ को छोड़ कर कभी और कोई उपन्यास मज़बूरी में ही लिया था पर अब जब पढता हूँ तो लगता है जी उस समय भी इनको खरीदना चाहिए था क्योंकि ये राजन-इक़बाल सीरीज़ से किसी भी तरह से कम नहीं थी कई कहानियां तो राजन-इक़बाल सीरीज़ से भी बेहतर थी।
 इसे पढ़कर देखे मेरी बात पर आप को भी विश्वास हो जायेगा। फिर जल्दी ही नयी बाल पॉकेट बुक के साथ दुबारा मिलते है। होली कि आप सब को हार्दिक सुभकामनाएँ।

Wednesday, February 19, 2014

बाल पॉकेट बुक्स-रहस्य खुल गया (राजन-इक़बाल एस.सी बेदी)




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बाल पॉकेट बुक्स-रहस्य खुल गया (राजन-इक़बाल एस.सी बेदी)
इस सीरीज कि मैंने कई बाल पॉकेट बुक्स अपलोड की है और उन्हें लोगो ने खूब पसंद किया है और मुझे इसके साथ भी यही उम्मीद है। राजन-इक़बाल के जन्मदाता एस. सी. बेदी जी दुबारा से बाल पॉकेट बुक्स लिख रहे है और उम्मीद है की जल्दी ही हमें दुबारा से नयी बाल पॉकेट बुक्स पढ़ने को मिलेंगी। मेरा बहुत ही व्यस्त कार्यकर्म ने इसके अपलोडिंग में रोक लगा दी है और यही कॉमिक्स कि अपलोडिंग के साथ भी हो रहा है पर उम्मीद करता हूँ कि चाहे कम ही सही पर इन दोनों कि अपलोडिंग मै करता ही रहूँ।
 आज भी मेरा मन कुछ आशान्त है, पता नहीं लोग कब अपने सच्चे शुभचिंतको को पहचानेगे और उनकी बातो में नहीं आयेंगे जो उनसे सिर्फ अपने स्वार्थ के लिए ही जुड़े है। जीवन कभी-कभी कितना कठिन हो जाता है इसका अंदाजा मुझे आज कल खूब कायदे से हो रहा है। हम सब ने कभी न कभी जादूगर का खेल जरुर देखा होगा। हम सभी ये बात अच्छे से जानते है कि वो हमें बेवकूफ बनता है फिर भी हम हमेशा उसके बहकावे में आ जाते है जानते है क्यों ? क्योंकि वो अगर बाएं हाथ से हमें धोखा देना चाहता है तो हमारा ध्यान दायें हाथ कि तरफ लगा देता और बाएं हाथ से आराम से धोखा दे देता है और ख़ुशी से बेवकूफ बन कर खुश हो जाते है। हमारी जिंदगी में भी ऐसा ही होता है मान लिया लिया जाये कि मै स्कूल में अपनी क्लास में अच्छे से नहीं पढ़ा पता तो मै अपनी नौकरी बचाने के लिए क्या कर सकता हूँ तो उसका जो सबसे आसान तरीका है की मै स्कूल का ध्यान या हो किसी दूसरे टीचर पर लगा दूँ या फिर किसी बच्चे पर जिससे स्कूल मैनजमेंट का ध्यान मेरे पर से हट जाये और जिंदगी आराम से चलती रहे। मुझे तो लगता है की आधे से ज्यादा लोगो कि जिंदगी ऐसे ही चलती है और जिनको काम करना आता होगा उनके पास इन सब का समय ही नहीं होगा। इसमें गलती बनाने वालों कि नहीं बनने वालों की है।
 अब बात कुछ समय के बारे में कर लेनी चाहिए, मुझसे लोगो को इस बात से ज्यादा शिकायत रहती है कि मै स्कूल के बच्चो पर औरों कि तरह सख्त नहीं हूँ बल्कि जरुरत से ज्यादा नरम हूँ और मैं इस बात को मानता भी हूँ। पर अब समय बदल गया है आज के बच्चे समय से पहले बड़े हो गए है जो बात हमें २५ साल में भी पता नहीं चलती थी वो आज १० साल के बच्चो को पता है मतलब यदि मैं १५ से १८ के बच्चो को पढ़ा रहा हूँ तो मुझे उनके साथ कम से कम २५ साल के आदमी कि तरह से लेना चाहिए और उनके साथ वैसा ही व्यौहार करना चाहिए मैं वैसा ही करने कि कोशिश करता हूँ। अब बात सजा देने के तरीके ही है तो उसे हमें बदलने कि जरूरत है जो तरीका आज से १० साल पहले प्रभावी था वो आज उतना प्रभवी नहीं हो सकता। कुछ उसी तरह से जैसे आज से ५० साल पहले बैलगाड़ी सफ़र का अच्छा साधन था पर आज वो तारिक बचकाना ही है। मै अपने ब्लॉग पर जो कुछ भी लिखता हूँ वो मेरा व्यक्तिगत विचार होता है जैसा कि मै समझता हूँ कि होना चाहिए पर ये बिलकुल भी जरुरी नहीं है कि वो सर्वथा सही ही हो उसे सिर्फ मेरे विचार कि तरह ही लेना चाहिए।

Monday, June 10, 2013

मनोज BPB - कबीले का ओझा

मोपा  कबीले का न्यायप्रिय राजा और अन्य सरदार न चाहते हुए भी काबिले के ओझाओं और खासकर जोफा नामके सबसे बुजुर्ग और निर्दयी ओझा के हाथों निर्दोषों को यातनापूर्ण और अन्यायपूर्ण सजा देने के लिए बाध्य थे, क्योंकि अन्धविश्वासी जनता इन ओझाओं के वश में थी.

दो निर्दोष विदेशियों को बर्बरतापूर्वक मृत्युदंड देने के बाद सबने निर्णय लिया कि  इन ओझाओं का वर्चस्व समाप्त करके इनके जुल्म को रोका जाए ताकि फिर किसी निर्दोष को सजा न भुगतनी पड़े। पर क्या इस पवित्र उद्देश्य में वे सफल हो पाये?

जानने के लिए डाउन लोड कीजिये और पढ़िए एक शानदार बाल पॉकेट बुक - मनोज चित्रकथा के प्रकाशकों की ओर  से -  कबीले का ओझा


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Thursday, May 30, 2013

गंगा BPB- चौराहे की मौत (एस..सी. बेदी - राजन इकबाल )

अभिजीत भाई मेरी जानकारी में बाल पॉकेट बुक्स के सबसे बड़े प्रशंसकों में से एक हैं . और शायद सॉफ्ट कॉपी पढने वालों में सबसे बड़े। बीते कई दिनों से उनके अनुरोध के बावजूद में कोई बल पॉकेट शेयर नहीं कर पा रहा था, आज समय हुआ है तो अभिजीत भाई ख़ास  लिए आपके पसंदीदा लेखक और चरित्रों की एक बेहद पुरानी  और दुर्लभ कथा .
एस.  सी। बेदी राजन इकबाल

गंगा पॉकेट बुक्स द्वारा प्रकाशित - चौराहे की मौत

Saturday, April 13, 2013

NUTAN BPB - AAKHIRI NISHAN (RAJAN-IQBAAL) - SANJEEV JAIN

कल शाम से चल रही हवा और बारिश ने गर्मी के इस मौसम को खुशगवार बना दिया है, और खुशकिस्मती से आज थोडा सा समय भी मिल गया है कुछ शेयर करने के लिए।

आज जो बाल पॉकेट बुक्स प्रस्तुत है वो थोड़ी अलग है - अलग इसलिए की है तो ये हम सब के चहेते राजन-इकबाल की परन्तु इसे इनके जन्मदाता बेदी जी ने नहीं बल्कि किन्ही संजीव जैन जी ने लिखा है. पता है कुछ लोगों को ये अच्छा ना लगे पर मेरा ये मानना है की हर तरह की बाल पॉकेट - हर चरित्र, हर प्रकाशक और हर लेखक की हमें यहाँ पोस्ट करते रहनी चाहिए ताकि ब्लॉग की विविधता बनी रहे.

तो प्रस्तुत है नूतन पॉकेट बुक्स में प्रकाशित आखिरी निशान (राजन-इकबाल सीरिज) - संजीव जैन द्वारा लिखित.

डाउनलोड करने के लिए यहाँ क्लिक करें 

(आपके पढने के आनंद को बढाने अब से HR 300 DPI में )

Saturday, March 30, 2013

राज पॉकेट बुक्स-खूनी चट्टान (राजन-इकबाल) एस.सी.बेदी


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राजा पॉकेट बुक्स-खूनी चट्टान
 इस बार मै आप लोगो के सामने जो बाल पॉकेट बुक्स ले कर आ रहा हूँ वो कई मायने में बेहतर है। कहानी में सस्पेंस है हॉरर है और साथ में इकबाल की सदाबहार मस्ती है पढने में बाद आप वाह कर उठेंगे।
 कहानी शुरु होती है एक हत्या से और पुलिश को लगता है हार्ट अटैक का केश। और मरने वाली के नाम से है 3000000 लाख का बीमा और बीमा की रकम के लिए ये हत्या संभव तो लगती है पर पुलिश को कुछ भी गड़बड़ नहीं लग रहा है पर बीमा कंपनी को सब कुछ सही नहीं लग रहा है इसलिए वो पहुचती है राजन-इकबाल के पास कि वो देखे की इस मामले में कोई गड़बड़ है की नहीं और अगर कोई गड़बड़ है तो उसका खुलाशा करें। राजन ये केस इकबाल और सलमा के हवाले कर देता है और इकबाल किसी काम को कभी भी गंभीरता से नहीं करता यहाँ भी कुछ ऐसा ही लगता है पर वो गंभीर न लगते हुवे कितना गंभीर रहता है ये भी इस कहानी एक मुख्य आकर्षण है। अब ये देखना है की क्या इकबाल और सलमा इस केस को अकेले ख़त्म करते है या राजन पर्दे के पीछे इस केस पर अपने ढंग भी काम कर रहा है।

Tuesday, March 26, 2013

राज पॉकेट बुक्स-गोलियों का रहस्य (राजन-इकबाल) एस.सी.बेदी



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राज पॉकेट बुक्स-गोलियों का रहस्य (राजन-इकबाल) एस.सी.बेदी
बाल पॉकेट बुक्स को आप काफी समय बाद अपलोड कर रहा हूँ। कारण मेरी बहुत ज्यदा व्यस्त्ता,और अनुपम भाई का दुबारा बाल-पॉकेट बुक्स को उपलोड करने की शुरुवात ने भी मुझे बाल-पॉकेट को अपलोड न करने की थोड़ी से छूट जरुर प्रदान कर दी, कि बाल-पॉकेट बुक्स अपलोड हो ही रही है. फिर कुछ लोगो को ये लगेगा की कॉमिक्स तो मै लगातार अपलोड कर ही रहा था तो बाल-पॉकेट बुक्स को लेकर ही व्यस्त्ता।
तो इसके पीछे दो कारण है पहला तो कॉमिक्स बाल पॉकेट की तुलना में स्कैन करना आसान है और दूसरा, कॉमिक्स को तो मेरे और मित्र भी स्कैन करके मुझे दे रहे थे,मतलब चाहे मै स्कैन करूँ चाहे न करूँ कॉमिक्स तो फिर भी अपलोड कर सकता हूँ।पर बाल-पॉकेट बुक्स तो मुझे स्कैन करके अपलोड करनी पड़ेगी,और अगर मै व्यस्त हूँ तो इसके उपलोड होने का मौका नहीं बन पायेगा जो की पिछले कुछ दिनों में हुवा। वैसे तो अब मै पहले जैसा व्यस्त नहीं हूँ और अनुपम भाई भी बाल-पॉकेट बुक्स उपलोड करने में असमर्थ लग रहे है तो मै कोशिश करूँगा की बाल-पॉकेट बुक्स अपलोड होती रहे और इनके उपलोड होने में ज्यदा वक़्त न लगे बाकि तो समय के हाथ में है की आगे क्या होता है।
आज होली भी है इसलिए मैंने बाल-पॉकेट बुक्स को चाहने वालों के लिए राजन-इकबाल सिरीज़ का ये बेहतर बाल-पॉकेट स्कैन किया है और आप सब के लिए उपलोड कर रहा हूँ उम्मीद है की ये बाल-पॉकेट बुक आप सब को अत्याधिक पसंद आएगा। कृपा मुझे अपनी राय से अवगत करवाएं जिससे मुझे बेहतर कहानी अपलोड करने में मदद मिल सके।