Tuesday, April 24, 2012

चीखती रात


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एस .सी . बेदी और राजन-इकबाल मतलब एक ही था की कहानी बेजोड़ होगी और पब्लिसर के लिए बिकने की गारंटी . ये ऐसे ही तो नहीं था. बेदी जी की कहानी में हमेशा देश प्रेम से भरपूर प्रसंग , दिमाग लगते जासूसी प्रसंग, इकबाल की हसाती बाते, पाठक कभी भूल नहीं पाते थे. इनका सिर्फ नाम बिकता था बच्चो के लिए इनसे बढ़िया कोई नहीं लिख पाया और न ही कभी कोई लिख पायेगा. कहानी हमेशा की तरह बेजोड़ है पढ़े और इनकी कहानी का आनंद ले

Saturday, April 14, 2012

गुडिया की शादी

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गुडिया की शादी
बाल पॉकेट बुक्स में राजन- इकबाल यानी एस. सी. बेदी. ये चरित्र इतना प्रसिद्ध था की हर प्रकाशक ने इस चरित्र की नक़ल करवाई और राजन-इकबाल (एस.सी.बेदी) के नाम से छाप कर खूब बेचा. जानकारों का कहना है की कुल राजन-इकबाल में से ३० % से ज्यादा बाल पॉकेट बुक बेदी जी की लिखी नहीं है वो नकली है. क्योंकि उस समय चरित्र कॉपी राईट नहीं था इसलिए जिस प्रकासक को बेदी जी छोड़ देते थे वे उनके नाम से नकली नोवल छाप देते थे. इससे बचने के लिए वो हर नोवल पर असली की पहचान बताते रहते थे . ये नोवल पहला नोवल है जो मेरी निगाह में आया है जिसमे राजन इकबाल को तो इस्तेमाल किया है पर एस.सी. बेदी जी का नाम नहीं इस्तेमाल किया. जो की बड़ी अनोखी बात लगती है कहानी के लिहाज़ से ये नोवल बिलकुल भी बुरी नहीं है और बेदी जी से ख़राब लिखी बिलकुल भी नहीं लगती है.