Sunday, October 21, 2012

राजा पॉकेट बुक्स- खौफनाक लंगड़ा (राजन-इकबाल)-एस.सी.बेदी


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राजा पॉकेट बुक्स- खौफनाक लंगड़ा (राजन-इकबाल)-एस.सी.बेदी
 बाल पॉकेट बुक्स जब से मैंने स्कैन किया तब से ले कर आज तक ये बात हमेशा महसूस किया है की जिनता कॉमिक्स तो पढने वाले है उतना बाल पॉकेट बुक्स तो पढने वाले नहीं है. और तो और कमेंट के मामले में भी कॉमिक्स ब्लॉग पर ज्यादा कमेंट लोग करते है पर बाल पॉकेट बुक्स के ब्लॉग पर लोग कम ही आते है. ये भी एक बहुत बड़ा कारण रहा है कॉमिक्स की तुलना में बाल पॉकेट का कम अपलोड होना. कॉमिक्स की तुलना में इसे स्कैन करना भी मुश्किल काम है. पन्नो के ज्यदा होने के कारण एक तो समय ज्यादा लगता है और उनकी बयिन्डिंग के साथ उन्हें स्कैन करना भी बहुत मुश्किल हो जाता है.और लोग पूछते भी नहीं जब की बाल पॉकेट बुक्स के लिए हमें ज्यदा प्रोत्साहन मिलना चाहिए जो की नहीं हो पा रहा है. और इसका अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है की कॉमिक्स ब्लोग्स की नेट पर भरमार है पर बाल पॉकेट बुक्स के ब्लॉग गिनती के है और जहाँ तक मेरी जानकारी है इस ब्लॉग को छोड़ कर कही भी नए अपलोड नहीं आ रहे है. मै आप सब से ये अनुरोध करता हूँ की जितना संभव हो,हमारा प्रोत्साहन करें जिससे हम काम पूरी लगन से कर सके.
वैसे तो इस बाल पॉकेट बुक की कहानी की बात करने की बिलकुल जरुरत नहीं है क्योंकि जब आप इसे पढेंगे तो बस पढ़ते जायेंगे. ये भी बहुत ही शानदार कहानी के साथ है और उस पर इकबाल की मस्ती भी इसका स्वाद बढा देती है इस बेहतर कहानी को पढ़े फिर मिलते है ...............

Wednesday, October 17, 2012

आँख का तमाशा bpb एस.सी बेदी (राजन-इकबाल)


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आँख का तमाशा
 "बाल पॉकेट बुक्स'
 जितना लोग इन्हें पढ़ते थे उतना इसके बारे में लोग आज बिलकुल नहीं सोचते. कॉमिक्स के साथ-साथ मुझे बाल पॉकेट बुक्स पढने का भी नशा खूब चढ़ा. पर कलेक्शन करने जैसा मन तो कभी भी नहीं हुआ.कॉमिक्स के कलेक्शन को लेकर तो मै बहुत पहले से सजग था पर बाल पॉकेट बुक्स को लेकर शायद आज भी नहीं हूँ. और जिन एक के बाल पॉकेट बुक्स मै पढता था वो थे एस .सी .बेदी जी और उनके किरदार राजन-इकबाल. और इतनी पढ़ी की आज मै ये बताने की हालत में नहीं हूँ कितनी पढ़ी होगी. एक समय तो एक दिन में मै १० तक बाल पॉकेट बुक्स पढ़ डालता था. इन्हें पढता तो आज भी बहुत चाव से हूँ.और कलेक्शन भी बाल पॉकेट बुक्स का मेरे पास अच्छा खासा है.
पर एक समय तो मेरा कॉमिक्स और बाल पॉकेट बुक्स से मन पूरी तरह से हट गया था. और ऐसा लगने लगा था की मेरे अलावा कोई भी इन्हें नहीं पढता होगा. फिर नेट की दुनिया में आना हुआ मेरा, और अनुपम जी के ऑरकुट कम्युनिटी 'मनोज कॉमिक्स मैडनेस' ज्वाइन किया तब जा कर मेरा कॉमिक्स और बाल पॉकेट बुक्स का प्यार दुबारा परवान चढ़ा. मैंने मोहित भाई की मदद से कॉमिक्स स्कैन करना शुरु किया. पर बाल पॉकेट बुक्स के बारे में कोई बात ही नहीं करता था. फिर मुझे जा कर इस ब्लॉग के बारे में पता चला और ये काफी दिनों से बंद चल रहा था.मैंने अनुपम जी से बात की और उन्होंने मुझे इस ब्लॉग का को-ओंनर बना दिया इस तरह से बाल पॉकेट बुक्स को इस ब्लॉग पर पोस्ट करना शुरू किया जो आज तक जारी है और उम्मीद है           ता- जिन्दगी जारी रहेगा.
आज कुछ पुरानी यादे ताज़ा हो गए तो मैंने यहाँ आप सब के सामने उतार दिया. अब ये कुछ ज्यादा हो गया है. "आँख का तमाशा" के बारे में मै बस इतना ही कहूँगा,की ये मेरी नज़र में सबसे बेहतर बाल पॉकेट बुक्स में से एक है. पढ़े और इसका आनंद ले फिर मिलते है .....

Monday, October 1, 2012

मीरा BPB - विनोद दुश्मनों के जाल में (विनोद-हामिद)

विश्व सम्राट बनाने का सपना देखने वाले माटुंगा के जाल में फंस गया विनोद। आगे क्या हुआ जाने ये बाल उपन्यास पढ़कर - 

विनोद दुश्मनों के  जाल में (डबल सीक्रेट एजेंट 001/2 विनोद हामिद सीरिज में) मीरा द्वारा लिखित और मीरा पॉकेट बुक्स में प्रकाशित रोमांचक कथा जो दो भागों में फैली हुयी है।

दूसरा भाग 'आग के बेटे' जल्द ही इस ब्लॉग पर उपलब्ध होगा। तब तक मजा लीजिये एक रोचक और सनसनीखेज कथा का।