Wednesday, October 17, 2012

आँख का तमाशा bpb एस.सी बेदी (राजन-इकबाल)


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आँख का तमाशा
 "बाल पॉकेट बुक्स'
 जितना लोग इन्हें पढ़ते थे उतना इसके बारे में लोग आज बिलकुल नहीं सोचते. कॉमिक्स के साथ-साथ मुझे बाल पॉकेट बुक्स पढने का भी नशा खूब चढ़ा. पर कलेक्शन करने जैसा मन तो कभी भी नहीं हुआ.कॉमिक्स के कलेक्शन को लेकर तो मै बहुत पहले से सजग था पर बाल पॉकेट बुक्स को लेकर शायद आज भी नहीं हूँ. और जिन एक के बाल पॉकेट बुक्स मै पढता था वो थे एस .सी .बेदी जी और उनके किरदार राजन-इकबाल. और इतनी पढ़ी की आज मै ये बताने की हालत में नहीं हूँ कितनी पढ़ी होगी. एक समय तो एक दिन में मै १० तक बाल पॉकेट बुक्स पढ़ डालता था. इन्हें पढता तो आज भी बहुत चाव से हूँ.और कलेक्शन भी बाल पॉकेट बुक्स का मेरे पास अच्छा खासा है.
पर एक समय तो मेरा कॉमिक्स और बाल पॉकेट बुक्स से मन पूरी तरह से हट गया था. और ऐसा लगने लगा था की मेरे अलावा कोई भी इन्हें नहीं पढता होगा. फिर नेट की दुनिया में आना हुआ मेरा, और अनुपम जी के ऑरकुट कम्युनिटी 'मनोज कॉमिक्स मैडनेस' ज्वाइन किया तब जा कर मेरा कॉमिक्स और बाल पॉकेट बुक्स का प्यार दुबारा परवान चढ़ा. मैंने मोहित भाई की मदद से कॉमिक्स स्कैन करना शुरु किया. पर बाल पॉकेट बुक्स के बारे में कोई बात ही नहीं करता था. फिर मुझे जा कर इस ब्लॉग के बारे में पता चला और ये काफी दिनों से बंद चल रहा था.मैंने अनुपम जी से बात की और उन्होंने मुझे इस ब्लॉग का को-ओंनर बना दिया इस तरह से बाल पॉकेट बुक्स को इस ब्लॉग पर पोस्ट करना शुरू किया जो आज तक जारी है और उम्मीद है           ता- जिन्दगी जारी रहेगा.
आज कुछ पुरानी यादे ताज़ा हो गए तो मैंने यहाँ आप सब के सामने उतार दिया. अब ये कुछ ज्यादा हो गया है. "आँख का तमाशा" के बारे में मै बस इतना ही कहूँगा,की ये मेरी नज़र में सबसे बेहतर बाल पॉकेट बुक्स में से एक है. पढ़े और इसका आनंद ले फिर मिलते है .....