Tuesday, December 4, 2012

मनोज पॉकेट बुक्स-गद्दारे वतन


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मनोज पॉकेट बुक्स-गद्दारे वतन
मनोज पॉकेट बुक्स में जो कुछ भी छपा वो सब 'मनोज' के ट्रेड नेम से छपा,जो की कई लेखकों का समूह होना चाहिए(पर मेरे पास इसका कोई प्रमाण नहीं है) इस नाम से मनोज पॉकेट बुक्स ने बाल पॉकेट बुक्स के अलावा सैकड़ों सामाजिक उपन्यास छापे जो की बहुत पढ़े जाते थे। जिसने भी उनके सामाजिक उपन्यास पढ़ें होंगे वो जानते होंगे की उनका स्तर क्या है।
 मै आज तक "मनोज" के जितने में सामाजिक उपन्यास पढ़े है बिना रोये मै उन्हें कभी भी ख़त्म नहीं कर पाया।और उनके बाल पॉकेट बुक्स को तो पढ़कर मुझे हमेशा ऐसा लगता है की मै अपने देश और समाज लिए कुछ कर जाऊ।जितने बेहतर तरीके से इनके बाल पॉकेट बुक्स लिखे गए है की पढने बाद मन देश प्रेम से भर जाता है। ये कहानी भी बिलकुल वैसी ही है, पढने के बाद इसे हमेशा याद रखेंगे इसका मेरा दावा है।
ये बाल पॉकेट बुक्स मुझे बहुत ख़राब हालत में मिली थी जिसे दीमक खा रही थी इसलिए मैंने इसे स्कैन करके हमेशा के लिए बचाने की कोशिश की है और अब तो ये बाल पॉकेट बुक मेरे पास भी नहीं है इसलिए अगर इससे कोई कमी रह गयी हो उसके लिए मुझे खेद है। फिर मिलते है ........